अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणाम और भारत पर उनका संभावित प्रभाव

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणाम और भारत पर उनका संभावित प्रभाव

अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण हासिल करने के साथ सीनेट में भी महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज की है। इस राजनीतिक बदलाव के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति कमजोर हुई है, जिससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तथा एच-1बी वीजा जैसे अहम मुद्दों पर परोक्ष रूप से सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, अमेरिकी संसद का यह बदला हुआ स्वरूप कुछ क्षेत्रों में नई चुनौतियां भी सामने ला सकता है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणाम और भारत पर उनका संभावित प्रभाव

व्यापार और टैरिफ नीतियों पर पड़ेगा असर

व्यापार और टैरिफ के मोर्चे पर डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाले हाउस का रुख महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ और रूस से तेल खरीद को लेकर दबाव बढ़ाया गया था, लेकिन अब डेमोक्रेट्स इन नीतियों की जांच और सुनवाई कर सकते हैं। इससे राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की शक्तियों पर अंकुश लग सकता है और भारत को चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान बेहतर सौदेबाजी का मौका मिल सकता है।

भारतीय आईटी पेशेवरों और एच-1बी वीजा के लिए राहत

अमेरिका के नए राजनीतिक समीकरणों का असर एच-1बी वीजा और आव्रजन नीतियों पर भी पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन द्वारा सितंबर 2025 में कुछ नए एच-1बी आवेदनों पर एक लाख डॉलर की भारी फीस लगाई गई थी, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा भारतीय आईटी पेशेवरों को भुगतना पड़ रहा था। चूंकि भारतीय पेशेवर एच-1बी स्वीकृतियों का लगभग सत्तर प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, इसलिए डेमोक्रेटिक कांग्रेस द्वारा इस फीस को कानून का रूप देने के प्रयासों पर रोक लगाने और प्रशासन की नीतियों पर कड़ी निगरानी रखने की संभावना है।

रक्षा और रणनीतिक साझेदारी में निरंतरता

रक्षा, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक सहयोग के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंधों के निरंतर बने रहने की उम्मीद है। चीन को संतुलित करने की रणनीति, क्वाड सहयोग, रक्षा साझेदारी, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे मुद्दों पर अमेरिकी संसद के दोनों दलों का व्यापक समर्थन प्राप्त है। मिडटर्म चुनावों के परिणामों का इन रणनीतिक संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

रूस और ईरान से ऊर्जा खरीद पर सख्ती की आशंका

दूसरी ओर, रूस और ईरान से ऊर्जा तथा रक्षा खरीद के मामले में डेमोक्रेटिक कांग्रेस अधिक सख्त रुख अपना सकती है। डेमोक्रेट्स पारंपरिक रूप से रूस के खिलाफ कड़ा रवैया रखते हैं और यूक्रेन को मजबूत समर्थन देते हैं। ऐसे में ऊर्जा और रक्षा संतुलन से जुड़े मामलों में भारत के सामने कुछ नई कूटनीतिक चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं।

Anju Kunwar

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