2 Minutes
“जब सायरन बजे तो समझिए, तैयारी नहीं — जिंदगी बचाने का वक्त है!”
देहरादून, 7 मई।शाम के चार बजकर पंद्रह मिनट।शहर की रफ्तार धीमी हो गई।हवा में एक सिहरन सी दौड़ गई।आराघर से लेकर घंटाघर तक, लक्खीबाग से लेकर आईएसबीटी तक — सायरनों की आवाज़ गूंजने लगी।...
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