केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को मानव तस्करी के खिलाफ अभियानों को अधिक समन्वित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय का कहना है कि नए आपराधिक कानूनों की सफलता जमीनी स्तर पर उनके सही कार्यान्वयन पर निर्भर करती है।

नए कानूनों और डिजिटल सबूतों का उपयोग
हाल ही में जारी परामर्श में, मंत्रालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों के व्यापक उपयोग पर बल दिया है। जांच अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करें और तस्करी के नेटवर्क में शामिल वित्तपोषकों, आयोजकों तथा अन्य मुख्य सदस्यों की पहचान करें। इसके अलावा, डिजिटल साक्ष्यों जैसे एन्क्रिप्टेड चैट, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड और जियोलोकेशन डेटा को सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है।
मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (AHTUs) को मजबूत करना
परामर्श में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTUs) की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और उन्हें पर्याप्त रूप से स्टाफयुक्त करने की बात कही गई है। श्रम तस्करी से निपटने के लिए पुलिस, श्रम विभागों और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से ईंट भट्ठों, स्टोन खदानों, कपड़ा उद्योगों और घरेलू कामगारों के क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने को कहा गया है ताकि पीड़ितों की सही पहचान की जा सके।
साइबर गश्त और भर्ती घोटालों पर नजर
विदेशी नौकरी के फर्जी विज्ञापनों और साइबर-फ्रॉड के मामलों से बचने के लिए राज्य साइबर सेल को सोशल मीडिया और नौकरी पोर्टलों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, तलाशी अभियानों के दौरान ऑडियो-वीडियोग्राफी को अनिवार्य बनाने और फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रक्रियाओं के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच की चेतावनी भी दी गई है।

