सड़क हादसों के वार्षिक आंकड़ों के प्रकाशन में देरी, शीर्ष अदालत ने केंद्र को भेजा नोटिस

सड़क हादसों के वार्षिक आंकड़ों के प्रकाशन में देरी, शीर्ष अदालत ने केंद्र को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 की सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने में हुई देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट प्रकाशित करने के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

सड़क हादसों के वार्षिक आंकड़ों के प्रकाशन में देरी, शीर्ष अदालत ने केंद्र को भेजा नोटिस

सड़क सुरक्षा और आंकड़ों का महत्व

देशभर में 2024 के दौरान कुल 4.7 लाख सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जिनमें लगभग 1.7 लाख लोगों की जान गई और 2.3 लाख लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सड़क सुरक्षा नीतियों और दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सटीक आंकड़ों का समय पर विश्लेषण बेहद जरूरी होता है। सर्वोच्च अदालत ने पिछले वर्ष अप्रैल में आदेश दिया था कि हर साल सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष समाप्त होने के छह महीने के भीतर प्रकाशित कर दी जानी चाहिए। इस नियम के अनुसार वर्ष 2025 की रिपोर्ट जून 2026 तक आ जानी चाहिए थी, लेकिन इसके प्रकाशन में देरी पर अदालत ने नाराजगी जताई है।

अदालत का सख्त रुख और अवमानना अर्जी

न्यायालय की एक पीठ ने इस मामले में दाखिल अवमानना अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। याचिका में यह बात सामने आई थी कि समय पर आंकड़े न मिलने से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और सुधारात्मक कदम उठाने में बाधा आती है। इन वार्षिक रिपोर्टों के जरिए यह पता चलता है कि किन राज्यों, जिलों या सड़कों पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं और उनके मुख्य कारण क्या हैं।

आगरा में भारी वाहनों के प्रवेश पर भी जवाब तलब

इसके साथ ही, आगरा में भारी वाहनों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का मामला भी शीर्ष अदालत के संज्ञान में आया है। याचिका के अनुसार, शहर में करोड़ों रुपये की लागत से उत्तरी बाईपास का निर्माण होने के बावजूद भारी वाहन शहर के बीच से गुजर रहे हैं, जिससे पैदल यात्रियों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। इस पर भी अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Anju Kunwar

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