सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में संविधान की प्रस्तावना का पाठ अनिवार्य करने की याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में संविधान की प्रस्तावना का पाठ अनिवार्य करने की याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में सुबह की असेंबली के दौरान संविधान की प्रस्तावना का पाठ अनिवार्य बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से साफ मना कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि देश के पाठ्यक्रम में प्रस्तावना को पहले से ही शामिल किया गया है। यह मामला शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा हुआ था जिस पर शीर्ष अदालत ने यह निर्णय सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में संविधान की प्रस्तावना का पाठ अनिवार्य करने की याचिका की खारिज

याचिका में की गई थी राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग

दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज के एक सहायक प्रोफेसर द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका के माध्यम से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को एक समान राष्ट्रीय नीति तैयार करने का निर्देश देने की मांग उठाई गई थी। याचिकाकर्ता का उद्देश्य स्कूली बच्चों के बीच कम उम्र से ही संवैधानिक जागरूकता और मूल्यों को बढ़ावा देना था।

अदालत की पीठ ने क्या दिया तर्क?

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बेंच ने की जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि संविधान की प्रस्तावना स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा है और इसे छठी कक्षा के छात्रों को पहले से ही पढ़ाया जा रहा है।

याचिकाकर्ता के मुख्य बिंदु

दाखिल की गई याचिका में यह तर्क दिया गया था कि राष्ट्रगान की तरह ही यदि प्रतिदिन स्कूल असेंबली में प्रस्तावना का सामूहिक पाठ कराया जाए, तो छात्र न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूलभूत संवैधानिक आदर्शों से अधिक गहराई से परिचित हो सकेंगे। इसके साथ ही याचिका में महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्यों में की गई उन पहलों का भी हवाला दिया गया था जहां स्कूलों की प्रार्थना सभा में प्रस्तावना को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। याचिका में मई महीने के एक सीबीएसई सर्कुलर का भी जिक्र किया गया था जिसमें स्कूलों से असेंबली में सकारात्मक गतिविधियों को शामिल करने का अनुरोध किया गया था।

Anju Kunwar

Learn More →