हाल ही में सामने आए एक देशव्यापी सर्वे के अनुसार, अधिकांश भारतीयों को इस बात को लेकर गहरी आशंका है कि उनके घरों तक पहुंचने वाले फल और सब्जियां कितने शुद्ध हैं। लोग खरीदारी के दौरान अक्सर कीमतों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उनमें मौजूद खतरनाक रसायनों की मौजूदगी पर उनका ध्यान नहीं जाता है। इस स्थिति ने आम नागरिकों की सेहत को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है।

सर्वे के चौकाने वाले आंकड़े
लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए इस राष्ट्रव्यापी अध्ययन में यह बात सामने आई है कि चार में से तीन नागरिकों को अपनी खाने की चीजों की शुद्धता के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं होती है। इसके अलावा, करीब दो-तिहाई लोगों को स्थानीय विक्रेताओं पर यह संदेह रहता है कि वे केमिकल के जरिए पकाए गए या रंगे हुए खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। हालांकि, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक बाजारों और स्थानीय स्टोरों से ही खरीदारी करते हैं। सर्वे में यह भी पता चला है कि यदि उपभोक्ताओं को पूरी तरह प्राकृतिक रूप से तैयार और बिना रंग वाले उत्पाद मिल जाएं, तो उनमें से 72 प्रतिशत लोग इसके लिए अधिक दाम चुकाने को तैयार हैं। वहीं, लगभग 80 प्रतिशत लोगों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन स्टोरों और संगठित खुदरा दुकानों पर शुद्धता की सख्त गारंटी सुनिश्चित की जाए।
कैल्शियम कार्बाइड और अन्य रसायनों का खतरा
बाजार में फलों और सब्जियों को जल्दी पकाने तथा आकर्षक दिखाने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किए जाने के कई मामले प्रकाश में आए हैं। विभिन्न राज्यों में प्रशासन द्वारा समय-समय पर छापे मारकर भारी मात्रा में दूषित फल जब्त किए जाते हैं। अधिकारियों द्वारा पकड़े गए ऐसे मामलों में आम, केले और अन्य फल बड़ी मात्रा में शामिल होते हैं।
भारत में फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। यह रसायन नमी के संपर्क में आकर एसिटिलीन गैस बनाता है, जिससे फल बाहर से पके हुए नजर आने लगते हैं। इस प्रकार के रसायनों में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे अत्यंत जहरीले तत्वों के अंश भी पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

