प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: पिछले 25 वर्षों में हुआ 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: पिछले 25 वर्षों में हुआ 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत पिछले 25 वर्षों में देश भर में लगभग 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में चलने योग्य पक्की सड़कों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि ये केवल परिवहन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि विकास के नए अवसर खोलती हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: पिछले 25 वर्षों में हुआ 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण

पीएमजीएसवाई चिंतन शिविर और भविष्य की रूपरेखा

इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण सड़क संपर्क को और अधिक मजबूत करने के लिए भविष्य की कार्ययोजना तैयार करना था। केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र सत्यापन, निगरानी और समय पर निर्णय लेने के लिए डिजिटल तकनीक, जीपीएस-आधारित निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अधिक उपयोग का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने निर्माण कार्य समय पर पूरा करने और गुणवत्ता में सुधार पर भी जोर दिया।

पीएमजीएसवाई-IV के तहत नए लक्ष्य

योजना के चौथे चरण यानी पीएमजीएसवाई-IV के तहत 70,125 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इसके जरिए देश के 25,000 पात्र बिना संपर्क वाले गांवों और बस्तियों को जोड़ने के लिए लगभग 62,500 किलोमीटर लंबी हर मौसम में चलने योग्य सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने विशेष रूप से दुर्गम और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में लंबित कार्यों की कड़ी निगरानी करने की आवश्यकता पर बात की।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: पिछले 25 वर्षों में हुआ 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण

प्रौद्योगिकी और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा

चिंतन शिविर के दौरान जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा तैयार करने और नई निर्माण तकनीकों को अपनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आधुनिक डिजिटल टूल्स को तेजी से अपनाएं ताकि निर्माण कार्य में पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और अन्य तकनीकी संस्थानों के अनुभवों से सीख लेते हुए पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में टिकाऊ सड़कें बनाने पर जोर दिया। सरकार का यह संकल्प है कि तकनीक-सक्षम और मजबूत ग्रामीण सड़क नेटवर्क से ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक लाभ मिल सके।

Anju Kunwar

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